Pahadi wala ghar

तुम  कहते  थे  पहाड़ी  वाले घर पर रहना है,सुनो ढूंढ लिया है पहाड़ी  पर घर जहां  सूरज की पहली  किरन  हमें जगायेगी ,
सुनो  ढूंढ लिया है पहाड़ी  पर घर जहां से बारिश की फूहारें खिड़की से हमारे  कमरे  में आयेंगी ,सुनो  ढूंढ  लिया है  पहाड़ी  पर  घर  जिसकी  छत  पर  बैठ तुम मुझे निहारोगे और मैं तारों को,जानती हूँ  मुझे निहारते  हुये यही  कहोगे  तुम आज भी  उतनी  प्यारी लगती  हो जितनी  तीस  साल पहले  लगती  थी
बस  आ  जाना  वादा निभाने  वो साठ  की  उम्र में कांपते हुये  हाथों  को  थामने

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